द फॉलोअप डेस्क
डिजिटल अरेस्ट में 78 साल के रिटायर बुजुर्ग को 22.92 करोड़ का नुकसान होने के मामले में रिजर्व बैंक ने 5 संबंधित बैंकों को मुआवजे की रकम चुकाने का आदेश दिया है। ये वो बैंक हैं, जहां से पिछले साल धोखाधड़ी से निकाले गए पैसे ट्रांसफर करने के लिए अवैध खाते खोले गए थे। रिजर्व बैंक ने अब कहा है कि कहा है कि वे पीड़ित को जमा की गई रकम का 5% से 7.5% हिस्सा मुआवजे के रुप में दें। ये पांच बैंक हैं: एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक और यस बैंक। नई दिल्ली में RBI के लोकपाल द्वारा 25 फरवरी को जारी एक आदेश में इन बैंकों से कहा गया है कि वे मिलकर पीड़ित को 1.31 करोड़ रुपये का भुगतान करें। जुर्माने का यह आदेश उस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम है जिसे दिल्ली का अब तक का सबसे बड़ा 'डिजिटल अरेस्ट' मामला माना जा रहा है। इस मामले में 78 वर्षीय नरेश मल्होत्रा, जो एक रिटायर्ड बैंकर हैं, को 2025 में डिजिटल अरेस्ट' कर 22.92 करोड़ रुपये ठग लिया गया। इस साल मार्च के अंत में, यह मामला CBI को सौंप दिया गया था।

पीड़ित ने दायर की थी आपराधिक रिट याचिका
मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक आपराधिक रिट याचिका भी दायर की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें उन 1.31 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके हैं। ये पैसे उन बैंकों में मिले जहां से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। उन्होंने हाल ही में RBI के पास एक अपील दायर की है, जिसमें उन्होंने ब्याज और हर्जाने के साथ पूरी रकम की मांग की है। RBI के के आदेश को देखने से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद, 20 फरवरी 2026 को एक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सभी प्रेषक और लाभार्थी बैंकों के अधिकारी मौजूद थे। इसका उद्देश्य बैंकों में "सेवाओं में कमियों" पर चर्चा करना था। यह देखते हुए कि मल्होत्रा ने खुद 'डिजिटल अरेस्ट' के दौरान बैंकों की शाखाओं में जाकर सभी लेन-देन शुरू किए थे, इसलिए प्रेषक बैंकों द्वारा 22.92 करोड़ रुपये के विवादित लेन-देन को पूरा करने में "सेवाओं में कोई कमी" नहीं पाई गई।

मौजूदा निर्देशों का पालन सही तरीके से नहीं किया गया
आदेश में यह भी कहा गया है कि इन पांच बैंकों द्वारा KYC मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मौजूदा निर्देशों का पालन सही तरीके से नहीं किया गया। आदेश में कहा गया है, “ये कमियां मुख्य रूप से बैंक खातों के संचालन और मनी म्यूल्स, पैसे के लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते, से जुड़े KYC दिशानिर्देशों का ठीक से पालन न करने, और इन खातों में होने वाले लेन-देन की निगरानी न करने से संबंधित थीं। इसलिए इन बैंकों पर जुर्माना लगाया गया है। ताकि बुजुर्ग पीड़ित के नुकसान की भरपाई हो सके। RBI के लोकपाल ने पांच बैंकों पर जुर्माना लगाया है, क्योंकि वे “RBI द्वारा जारी मौजूदा (वैध) सर्कुलर/दिशानिर्देशों के अनुसार म्यूल खातों की निगरानी करने के तरीके में कमी पाए गए।
क्या कहा गया है आदेश में
आदेश में कहा गया है कि Axis Bank, City Union Bank, ICICI Bank और IndusInd Bank से कहा गया कि वे मल्होत्रा को ट्रांसफर की गई रकम का 5% हिस्सा चुकाएं; वहीं Yes Bank को सलाह दी गई कि वह जमा की गई रकम का 7.5% हिस्सा मुआवजे के तौर पर दे। आदेश में इसकी वजह बताते हुए कहा गया कि म्यूल/निष्क्रिय खातों में होने वाले लेन-देन की निगरानी में कुछ अतिरिक्त कमियां पाई गई थीं।
